Advertisment

Indore News: इंदौर के शीतलामाता बाजार से मुस्लिम कर्मचारियों को हटाने का फैसला, विधायक के बेटे ने दिया था अल्टिमेटम

Indore Sheetlamata Bazar Controversy News: इंदौर के शीतलामाता बाजार में भाजपा नेता के बेटे की अपील के बाद मुस्लिम कर्मचारियों को हटाया गया।

author-image
Shashank Kumar
Indore Sheetlamata Bazar Controversy News

Indore Sheetlamata Bazar Controversy News

हाइलाइट्स 

  • मुस्लिम कर्मचारियों को हटाया गया

  • व्यापारियों में फैली असहजता

  • भाईचारे पर राजनीतिक वार

Advertisment

Indore Sheetlamata Bazar Controversy News: मध्य प्रदेश के इंदौर शहर का शीतलामाता बाजार, जो वर्षों से हिंदू-मुस्लिम सौहार्द का प्रतीक रहा है, आज एक बड़े सामाजिक और राजनीतिक विवाद का केंद्र बन गया है। इस विवाद की जड़ में हैं भाजपा (BJP) की विधायक मालिनी गौड़ के बेटे और नगर उपाध्यक्ष एकलव्य सिंह गौड़, जिन्होंने हाल ही में मुस्लिम कर्मचारियों को बाजार से हटाने का अल्टीमेटम दिया था।

उनका कहना है कि बाजार में लव जिहाद (Love Jihad) जैसी घटनाओं की आशंका है, और इससे हिंदू महिलाओं की सुरक्षा खतरे में है। अब यह मामला न सिर्फ स्थानीय व्यापारियों और कर्मचारियों को प्रभावित कर रहा है, बल्कि शहर की गंगा-जमुनी तहजीब (communal harmony) पर भी सवाल उठा रहा है।

https://twitter.com/BansalNews_/status/1971485306357788962

एकलव्य सिंह गौड़ ने दिया था अल्टीमेटम 

हिंद रक्षक संगठन के संयोजक एकलव्य सिंह गौड़ ने 25 अगस्त को शीतलामाता बाजार के व्यापारियों के साथ बैठक कर मुस्लिम कर्मचारियों को हटाने की बात कही थी। उन्होंने दावा किया कि कुछ मुस्लिम सेल्समैन महिलाओं से छेड़छाड़, रास्ता रोकने और लव जिहाद के संगठित अपराध में शामिल हैं। गौड़ का आरोप है कि “यह अब षड्यंत्र नहीं, बल्कि एक संगठित आपराधिक गतिविधि है।”

Advertisment

उनका बयान था कि अगर व्यापारी 25 सितंबर तक उनकी बात नहीं मानते, तो वे “अपने तरीके से” एक्शन लेंगे। इस अल्टीमेटम के बाद बाजार में तनाव की स्थिति बनी और अधिकांश दुकानदारों ने मुस्लिम कर्मचारियों को नौकरी से निकाल दिया।

व्यापारियों की मजबूरी या दबाव में फैसला?

बाजार में करीब 400 दुकानें हैं, जिनमें 70 से अधिक मुस्लिम सेल्समैन काम कर रहे थे। एसोसिएशन के महासचिव अतुल नीमा के अनुसार, अधिकांश मुस्लिम कर्मचारियों को हटाया जा चुका है और शेष को भी निकालने की प्रक्रिया जारी है।

व्यापारी पप्पू महेश्वरी कहते हैं, “हम अपने कर्मचारियों को हटाना नहीं चाहते थे, लेकिन समाजिक और राजनीतिक दबाव के चलते ऐसा करना पड़ रहा है।” उन्होंने यह भी स्वीकारा कि यह फैसला व्यापारिक नुकसान के साथ-साथ सदियों से चली आ रही एकता को तोड़ने जैसा है।

Advertisment

[caption id="attachment_902618" align="alignnone" width="1187"]Indore Sheetlamata Bazar Controversy News Indore Sheetlamata Bazar Controversy News[/caption]

हिंदू-मुस्लिम साझेदारी पर भी पड़ा असर

शीतलामाता बाजार सिर्फ कामकाज का केंद्र नहीं, बल्कि सांझा व्यापारिक संस्कृति की मिसाल रहा है। बलवंत सिंह राठौड़ जैसे व्यापारी, जिनकी दुकान एक मुस्लिम साझेदार के साथ है, अब अपने व्यवसाय से हाथ धो रहे हैं।

इस मामले में बलवंत सिंह ने कहा कि हमारी दुकान खाली करवाई जा रही है। सिर्फ इसलिए कि मेरा पार्टनर मुस्लिम है। ये भाईचारा खत्म किया जा रहा है। दूसरी ओर मुस्लिम दुकानदार मोहम्मद गुलजार कहते हैं, “हमने 30-35 साल शांति से काम किया है, लेकिन अब हमें केवल मुसलमान होने की वजह से हटाया जा रहा है।”

Advertisment

सांप्रदायिक ध्रुवीकरण की ओर इंदौर?

इंदौर, जो अब तक सांप्रदायिक सौहार्द का उदाहरण रहा है, इस घटनाक्रम के बाद दो भागों में बंटता नजर आ रहा है। कांग्रेस शहर अध्यक्ष चिंटू चौकसे ने इसे “शहर की संस्कृति को तोड़ने की साजिश” बताया। उन्होंने कहा, “एकलव्य गौड़ का बयान और बैठक इंदौर की साझा विरासत पर हमला है।”

हालांकि एकलव्य गौड़ इस बात से इनकार करते हैं कि उन्होंने मुस्लिम कहकर किसी को निशाना बनाया है। उनका कहना है कि उनका उद्देश्य सिर्फ “जिहादी मानसिकता” के खिलाफ है, न कि किसी धर्म विशेष के।

प्रशासन की चुप्पी और कानूनी सवाल

इस पूरे घटनाक्रम में सबसे बड़ा सवाल प्रशासन की चुप्पी पर उठ रहा है। क्या किसी व्यक्ति या संगठन को यह अधिकार है कि वह खुलेआम लोगों को धार्मिक पहचान के आधार पर निकालने की अपील करे? क्या यह भारत के संविधान और समानता के अधिकार (Right to Equality under Article 14) का उल्लंघन नहीं है?

Advertisment

कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह की अपील न केवल भेदभावपूर्ण है, बल्कि यह IPC की धारा 153A के तहत सांप्रदायिक सौहार्द को बिगाड़ने के प्रयास के रूप में देखी जा सकती है।

ये भी पढ़ें:  Indore Ex-Girlfriend Attack: इंदौर में एक्स गर्लफ्रेंड को एक्टिवा से मारी टक्कर,आरोपी लिव-इन में रहने का बना रहा था दवाब

लव जिहाद का मामला मिथक या सच?

गौरतलब है कि 'लव जिहाद' (Love Jihad) शब्द कोई कानूनी या संवैधानिक परिभाषा नहीं रखता। कई राज्य सरकारों ने इससे जुड़े कानून जरूर बनाए हैं, लेकिन अब तक कोई भी ऐसा ठोस डेटा नहीं आया है जो इसे "संगठित अपराध" साबित कर सके। राष्ट्रीय महिला आयोग और कई कोर्ट भी इस बात को कह चुके हैं कि हर अंतरधार्मिक प्रेम संबंध को संदेह की दृष्टि से देखना उचित नहीं।

Advertisment

ये भी पढ़ें:  MP News : MP में फिर लागू होगी भावांतर योजना, सोयाबीन किसानों को मिलेगा घाटे की पूरी भरपाई

हमें X, Facebook, WhatsApp, Instagram पर फॉलो करें। हमारे यू-ट्यूब चैनल News MPCG को सब्सक्राइब करें।

Sheetlamata Bazar Love Jihad Sheetlamata Bazar Controversy Religious Discrimination in India Madhya Pradesh BJP Controversy Love Jihad Sheetlamata Market Indore News hindi Indore Muslim Employees Removed Hindu Muslim Employment Ban Eklavya Singh Gaur News Communal Harmony in India BJP Muslim Ban Controversy
Advertisment
चैनल से जुड़ें